॥ आरती भगवान श्री धन्वंतरि जी की ॥
॥ Aarti Bhagwan Shri Dhanwantri Ji Ki ॥
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन्वं.॥ १ ॥
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन्वं.॥ २ ॥
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन्वं.॥ ३ ॥
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन्वं.॥ ४ ॥
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन्वं.॥ ५ ॥
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।जय धन्वं.॥ ६ ॥
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन्वं.॥ ७ ॥
॥ इति आरती भगवान श्री धन्वंतरि सम्पूर्णम ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
रविवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
18 Oct 2026 06:39:35 |
सूर्यास्त |
18 Oct 2026 17:51:24 |
चंद्रोदय |
18 Oct 2026 13:23:18 |
चंद्रस्थ |
18 Oct 2026 23:34:07 |
योग |
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सुकर्मा |
17 Oct 2026 23:02:17 से 18 Oct 2026 23:55:38 तक |
धृति |
18 Oct 2026 23:55:39 से 20 Oct 2026 00:34:39 तक |
शुभ काल |
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अभिजीत मुहूर्त |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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