॥ आरती बृहस्पति देव की ॥
॥ Aarti Brahaspati Dev Ki ॥
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥१॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥२॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥३॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥४॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥५॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥६॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥७॥
॥ इति आरती बृहस्पति देव सम्पूर्णम ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
रविवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
02 Aug 2026 05:51:12 |
सूर्यास्त |
02 Aug 2026 19:22:02 |
चंद्रोदय |
02 Aug 2026 21:29:39 |
चंद्रस्थ |
03 Aug 2026 10:05:15 |
योग |
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अतिगण्ड |
01 Aug 2026 23:22:33 से 02 Aug 2026 22:29:24 तक |
सुकर्मा |
02 Aug 2026 22:29:25 से 03 Aug 2026 21:13:12 तक |
शुभ काल |
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अभिजीत मुहूर्त |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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