॥ आरती श्री चित्रगुप्त महाराज की ॥
॥ Aarti Shri Chitragupta Maharaj Ki ॥
श्री विरंचि कुलभूषण, यमपुर के धामी।
पुण्य पाप के लेखक, चित्रगुप्त स्वामी॥ १ ॥
सीस मुकुट, कानों में कुण्डल अति सोहे।
श्यामवर्ण शशि सा मुख, सबके मन मोहे॥ २ ॥
भाल तिलक से भूषित, लोचन सुविशाला।
शंख सरीखी गरदन, गले में मणिमाला॥ ३ ॥
अर्ध शरीर जनेऊ, लंबी भुजा छाजै।
कमल दवात हाथ में, पादुक परा भ्राजे॥ ४ ॥
नृप सौदास अनर्थी, था अति बलवाला।
आपकी कृपा द्वारा, सुरपुर पग धारा॥ ५ ॥
भक्ति भाव से यह आरती जो कोई गावे।
मनवांछित फल पाकर सद्गति पावे॥ ६ ॥
॥ आरती श्री चित्रगुप्त महाराज की ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
17 Jun 2026 05:29:36 |
सूर्यास्त |
17 Jun 2026 19:33:16 |
चंद्रोदय |
17 Jun 2026 07:29:44 |
चंद्रस्थ |
17 Jun 2026 22:06:14 |
योग |
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ध्रुव |
17 Jun 2026 00:34:29 से 17 Jun 2026 20:50:49 तक |
व्याघात |
17 Jun 2026 20:50:50 से 18 Jun 2026 17:35:08 तक |
शुभ काल |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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