॥ भैरव जी की आरती ॥
॥ Bhairava Ji Ki Aarti ॥
जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा ।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ॥ जय॥
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक ।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥ जय॥
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥ जय॥
तुम बिन सेवा देवा सफल नहीं होवे ।
चौमुख दीपक दर्शन सबका दुःख खोवे ॥ जय॥
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी ।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी ॥ जय॥
पाव घूंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत ।
बटुकनाथ बन बालकजन मन हरषावत ॥ जय॥
बटुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे ।
कहे धरणीधर नर मनवांछित फल पावे ॥ जय॥
॥ इति भैरव आरती सम्पूर्णम ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
शनिवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
14 Mar 2026 06:46:12 |
सूर्यास्त |
14 Mar 2026 18:33:44 |
चंद्रोदय |
14 Mar 2026 03:47:56 |
चंद्रस्थ |
14 Mar 2026 13:54:27 |
योग |
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वरीयान |
13 Mar 2026 10:31:18 से 14 Mar 2026 10:42:17 तक |
परिघ |
14 Mar 2026 10:42:18 से 15 Mar 2026 10:25:12 तक |
शुभ काल |
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अभिजीत मुहूर्त |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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