॥ शिवजी जी की आरती ॥
॥ Shiv Ji Ki Aarti ॥
जय शिव ओंकारा हर जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा ॥ टेक॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे
हंसानन गरुडासन वृषवाहन साजे ॥ जय॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ जय॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ जय॥
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे
सनकादिक गरुडादिक भूतादिक संगे ॥ जय॥
कर मध्ये सुकमण्डल चक्र त्रिशूल धर्ता
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ जय॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रणवाक्षर ॐ मध्ये ये तीनों एका ॥ जय॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दो ब्रह्मचारी
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ जय॥
त्रिगुण स्वामी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ जय॥
॥ इति आरती शिवजी सम्पूर्णम ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
16 Sep 2026 06:18:52 |
सूर्यास्त |
16 Sep 2026 18:31:31 |
चंद्रोदय |
16 Sep 2026 11:16:18 |
चंद्रस्थ |
16 Sep 2026 21:25:10 |
योग |
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वैधृति |
15 Sep 2026 12:19:49 से 16 Sep 2026 12:22:09 तक |
विष्कुम्भ |
16 Sep 2026 12:22:10 से 17 Sep 2026 12:49:11 तक |
शुभ काल |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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