॥ श्री बृहस्पति स्तोत्र ॥
॥ Shri Brahaspati Stotra ॥
॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥
अस्य श्रीबृहस्पतिस्तोत्रस्य गृत्समद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,
बृहस्पतिर्देवता, बृहस्पतिप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
गुरुर्बृहस्पतिर्जीवः सुराचार्यो विदांवरः ।
वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः पीताम्बरो युवा ॥ १॥
सुधादृष्टिर्ग्रहाधीशो ग्रहपीडापहारकः ।
दयाकरः सौम्यमूर्तिः सुरार्च्यः कुङ्मलद्युतिः ॥ २॥
लोकपूज्यो लोकगुरुर्नीतिज्ञो नीतिकारकः ।
तारापतिश्चाङ्गिरसो वेदवैद्यपितामहः ॥ ३॥
भक्त्या बृहस्पतिं स्मृत्वा नामान्येतानि यः पठेत् ।
अरोगी बलवान् श्रीमान् पुत्रवान् स भवेन्नरः ॥ ४॥
जीवेद्वर्षशतं मर्त्यो पापं नश्यति नश्यति ।
यः पूजयेद्गुरुदिने पीतगन्धाक्षताम्बरैः ॥ ५॥
पुष्पदीपोपहारैश्च पूजयित्वा बृहस्पतिम् ।
ब्राह्मणान्भोजयित्वा च पीडाशान्तिर्भवेद्गुरोः ॥ ६॥
॥ इति श्री बृहस्पति स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
|
वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
|
सूर्यौदय |
29 Apr 2026 05:51:31 |
सूर्यास्त |
29 Apr 2026 19:04:42 |
चंद्रोदय |
29 Apr 2026 17:07:49 |
चंद्रस्थ |
30 Apr 2026 04:39:09 |
योग |
|
हर्षण |
28 Apr 2026 21:04:12 से 29 Apr 2026 20:51:16 तक |
वज्र |
29 Apr 2026 20:51:17 से 30 Apr 2026 20:54:44 तक |
शुभ काल |
|
अमृत काल |
|
ब्रह्म मुहूर्त |
|
अशुभ काल |
|
राहू |
|
यम गण्ड |
|
कुलिक |
|
दुर्मुहूर्त |
|
वर्ज्यम् |
|