॥ श्री देवी क्षमापण स्तोत्र ॥
॥ Shri Devi Kshamapan Stotra ॥
॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।
दासोऽयमिति मां मत्त्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥ १॥
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि ॥ २॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ ३॥
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।
यां गतिं समवान्पोति न तां ब्रह्मादयः सुराः ॥ ४॥
सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।
इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु ॥ ५॥
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ॥ ६॥
कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि ॥ ७॥
गृह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वप्रसादात्सुरेश्वरि ॥ ८॥
॥ इति श्री देवी क्षमापण स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
शुक्रवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
13 Mar 2026 06:47:27 |
सूर्यास्त |
13 Mar 2026 18:33:01 |
चंद्रोदय |
13 Mar 2026 03:03:30 |
चंद्रस्थ |
13 Mar 2026 12:54:36 |
योग |
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व्यातीपात |
12 Mar 2026 09:58:24 से 13 Mar 2026 10:31:17 तक |
वरीयान |
13 Mar 2026 10:31:18 से 14 Mar 2026 10:42:17 तक |
शुभ काल |
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अभिजीत मुहूर्त |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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