All Astrology Solutions

All Astrology Solutions

All Astrology Solutions
Shri Sidha Kunjika Stotra

॥ श्री सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र ॥
॥ Shri Sidha Kunjika Stotra ॥

॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥

ॐ अस्य श्रीकुञ्जिकास्तोत्रमन्त्रस्य सदाशिव
ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,श्रीत्रिगुणात्मिका देवता,
ॐ ऐं बीजं, ॐ ह्रीं शक्तिः, ॐ क्लीं कीलकम्,
मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।

शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥ १॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥ २॥

कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥ ३॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥ ४॥

अथ मन्त्रः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ॥ ५॥

इति मंत्रः
श्रूँ श्रूँ श्रूँ शं फट् ऐं ह्रीं क्लीं ज्वल उज्ज्वल प्रज्वल
ह्रीं ह्रीं क्लीं स्रावय स्रावय शापं नाशय नाशय
श्रीं श्रीं श्रीं जूं सः स्रावय आदय स्वाहा ।
ॐ श्लीं हूँ क्लीं ग्लां जूं सः ज्वल उज्ज्वल मन्त्रं
प्रज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ।

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि ।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥ ६॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि ।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे ॥ ७॥

ऐङ्कारी सृष्टिरूपायै ह्रीङ्कारी प्रतिपालिका ।
क्लीङ्कारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि ॥ ९॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कुञ्जिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥ १०॥

कालिका देवि
हुं हुं हुङ्काररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
ज्रां ज्रीं ज्रूं भालनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥ ११॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं ।
धिजाग्रम् धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥ १२॥

ॐ अं कं चं टं तं पं सां विदुरां विदुरां विमर्दय विमर्दय
ह्रीं क्षां क्षीं स्रीं जीवय जीवय त्रोटय त्रोटय
जम्भय जंभय दीपय दीपय मोचय मोचय
हूं फट् ज्रां वौषट् ऐं ह्ऱीं क्लीं रञ्जय रञ्जय
सञ्जय सञ्जय गुञ्जय गुञ्जय बन्धय बन्धय
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे सङ्कुच सङ्कुच
त्रोटय त्रोटय म्लीं स्वाहा ॥ १२॥

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ।
म्लां म्लीं म्लूं मूलविस्तीर्णा कुञ्जिकास्तोत्र हेतवे ।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिं कुरूष्व मे ॥ १३॥

कुञ्जिकायै नमो नमः ।
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे ।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥ १४॥

यस्तु कुञ्जिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥ १५॥

॥ इति सिद्ध श्री कुञ्जिका स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

आज का पंचांग ( Sat 24 Oct 2026 )

स्थान

अमृतसर, पंजाब, भारत

तिथि

  • त्रयोदशी, 23 Oct 2026 14:36:27 से 24 Oct 2026 13:37:24 तक
  • चतुर्दशी, 24 Oct 2026 13:37:25 से 25 Oct 2026 11:56:38 तक

वार

शनिवार

नक्षत्र

  • उत्तरभाद्रपदा, 23 Oct 2026 21:03:01 से 24 Oct 2026 20:32:06 तक
  • रेवती, 24 Oct 2026 20:32:07 से 25 Oct 2026 19:22:06 तक

सूर्यौदय

24 Oct 2026 06:44:06

सूर्यास्त

24 Oct 2026 17:44:59

चंद्रोदय

24 Oct 2026 16:29:50

चंद्रस्थ

25 Oct 2026 05:34:31

योग

व्याघात

23 Oct 2026 22:08:12 से 24 Oct 2026 20:00:54 तक

हर्षण

24 Oct 2026 20:00:55 से 25 Oct 2026 17:21:41 तक

शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त

  • 24 Oct 2026 11:52:27 से 24 Oct 2026 12:36:30 तक

अमृत काल

  • 24 Oct 2026 15:50:01 से 24 Oct 2026 17:23:57 तक

ब्रह्म मुहूर्त

  • 24 Oct 2026 05:07:47 से 24 Oct 2026 05:55:48 तक

अशुभ काल

राहू

  • 24 Oct 2026 09:29:18 से 24 Oct 2026 10:51:54 तक

यम गण्ड

  • 24 Oct 2026 13:37:06 से 24 Oct 2026 14:59:42 तक

कुलिक

  • 24 Oct 2026 06:44:06 से 24 Oct 2026 08:06:42 तक

दुर्मुहूर्त

  • 24 Oct 2026 08:12:12 से 24 Oct 2026 08:56:15 तक

वर्ज्यम्

  • 24 Oct 2026 06:27:01 से 24 Oct 2026 08:01:01 तक