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Shri Vindhyavasini Stotra

॥ श्री विन्ध्यवासिनी स्तोत्र ॥
॥ Shri Vindhyavasini Stotra ॥

॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥

श्रीनन्दगोपगृहिणीप्रभवा तनोतु भद्रं सदा मम सुरार्थपरा प्रसन्ना ।
विन्ध्याद्रि-गह्वरगताष्टभुजा प्रसिद्धा सिद्धैः सुसेवित-पदाब्जयुगा त्रिरूपा ॥ १॥
वेदैरगम्यमहिमा निजबोधतुष्टा नित्या गुणत्रयपराऽखिलभेदशून्या ।
एका प्रपञ्चकरणे त्रिगुणोरुशक्तिरुच्चावचाकृतिरथोऽचलजङ्गमात्मा ॥ २॥

पीयूष-सिन्धु-सुरपादपवाटिरत्नद्वीपे सुनीपवनशालिनि दुष्प्रवेशे ।
चिन्तामणि-प्रखचिते भवने निषण्णा विन्ध्येश्वरी श्रियमनल्पतरां करोतु ॥ ३॥
श्रुत्वा स्तुतिं विधिकृतां करुणार्द्रचित्ता नारायणेन सबलौ मधुकैटभाख्यौ ।
या सञ्जहार जगतां प्रलये तथा सा विन्ध्येश्वरी वितनुतां सुमनोरथान्मे ॥ ४॥

ब्रह्मेशविष्णु-पुरुहूत-हुताशनादितेजोभवा महिषपीडित-निर्जराणाम् ।
स्थानाप्तयेऽतिकृपया महिषं ममर्द विन्ध्येश्वरी हरतु रोगविपत्तिमाशु ॥ ५॥
या धूम्रचण्ड-बलिमुण्ड-निशुम्भ-शुम्भरक्तान्पिपेष सुरकार्यरताप्यनेका ।
दुःखाम्बुधौ निपतितस्य विमूढबुद्धेर्विन्ध्येश्वरी मम ददातु सुबुद्धिमम्बा ॥ ६॥

या दुर्गमं दनुभवं परिमर्द्य नाम्ना दुर्गा बभूव च ततान शुभं सुराणाम् ।
स्वाचारकर्म-विमुखस्य जुगुप्सितस्य विन्ध्येश्वरी दहतु वैरिगणान्समस्तान् ॥ ७॥
सम्प्राप्य जन्म वपुषः परिपोषणाय संख्यातिग-वृजिन-पुञ्जविधायिनो मे ।
चण्डासुरप्रमथिनी ललिता च नाम्ना विन्ध्येश्वरी हरतु जाड्यमहान्धकारम् ॥ ८॥

या तारयत्यखिल-दुष्कृतिलोकपुञ्जात्तारे’ति नाम गदिता भुवनेषु देवी ।
अज्ञानसिन्धुतरणे दृढनौस्वरूपा विन्ध्येश्वरी मम गुणाग्र्यसुतं ददातु ॥ ९॥
रक्ताम्बरा तरुणभानुरुचिः प्रसन्ना रक्ताम्बुजासन-कृतांघ्रियुगा धृतास्त्रा ।
रक्तैः स्वलङ्कृत-तनुर्मणिभूषणैश्च विन्ध्येश्वरी मम गिरं विशदां करोतु ॥ १०॥

रात्रीशकान्त-मणिकान्त-तनुर्विशाल-मुक्तालता-ललितवृत्तकुचा कृशाङ्गी ।
श्वेताम्बरा सितसरोजकृताधिवासा विन्ध्येश्वरी मम वचांसि पुनातु नित्यम् ॥ ११॥
आकर्ण्य दीनवचनं जननीव देवी पुत्रस्य मे सपदि सर्वगदान् जहार ।
लेखाङ्गनामुकुट-गुम्फित-चित्रपुष्प-रेणूत्करार्चित-पदाग्र नखांशुचन्द्रा ॥ १२॥

देवान्विहाय सकलानथ कर्म सर्वं लब्ध्वा जनुर्न कृतवांस्तव देवि! पूजाम् ।
मातर्नमामि सततं मनसा च वाचा देहेन पादकमलं शरणागतोऽहम् ॥ १३॥
देहीष्टमाशु विपुलं निजसेवकेभ्यो दारिद्र्यमम्ब हर चारिवधं कुरुष्व ।
शान्तिं च सर्वजगतां विशदां च बुद्धिं त्वं पालयातिकृपया चरणाब्जगं माम् ॥ १४॥

देव्याः स्तवं पठति यः शिवदं मनुष्यः पूतः श्रृणोति च मनो विविधैरभीष्टैः ।
पूर्णं हि तस्य भवति प्रसभं गदाश्च यान्ति क्षयं झटिति वायुकफानिलोत्थाः ॥ १५॥
त्र्यर्ष्यष्टभूमिमित-सर्वजिदाख्यवर्ष ईषे च मासि सितपक्षयुते कवीशः ।
स्तोत्रं लिलेख मथुरेश्वरमालवीयः सन्नाहमोचनभवो विधुरुद्रशम्याम् ॥ १६॥

॥ इति श्री विन्ध्यवासिनी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

आज का पंचांग ( Mon 26 Jan 2026 )

स्थान

अमृतसर, पंजाब, भारत

तिथि

  • अष्टमी, 25 Jan 2026 23:10:49 से 26 Jan 2026 21:18:32 तक
  • नवमी, 26 Jan 2026 21:18:33 से 27 Jan 2026 19:05:54 तक

वार

सोमवार

नक्षत्र

  • अश्विनी, 25 Jan 2026 13:35:47 से 26 Jan 2026 12:32:52 तक
  • भरणी, 26 Jan 2026 12:32:53 से 27 Jan 2026 11:08:54 तक

सूर्यौदय

26 Jan 2026 07:31:13

सूर्यास्त

26 Jan 2026 17:55:03

चंद्रोदय

26 Jan 2026 11:35:12

चंद्रस्थ

27 Jan 2026 01:45:34

योग

साध्य

25 Jan 2026 11:45:34 से 26 Jan 2026 09:11:15 तक

शुभ

26 Jan 2026 09:11:16 से 27 Jan 2026 06:19:36 तक

शुक्ल

27 Jan 2026 06:19:37 से 28 Jan 2026 03:12:42 तक

शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त

  • 26 Jan 2026 12:22:18 से 26 Jan 2026 13:03:53 तक

ब्रह्म मुहूर्त

  • 26 Jan 2026 05:55:13 से 26 Jan 2026 06:43:12 तक

अशुभ काल

राहू

  • 26 Jan 2026 08:49:11 से 26 Jan 2026 10:07:09 तक

यम गण्ड

  • 26 Jan 2026 11:25:07 से 26 Jan 2026 12:43:05 तक

कुलिक

  • 26 Jan 2026 14:01:03 से 26 Jan 2026 15:19:01 तक

दुर्मुहूर्त

  • 26 Jan 2026 13:03:53 से 26 Jan 2026 13:45:28 तक
  • 26 Jan 2026 15:08:38 से 26 Jan 2026 15:50:13 तक

वर्ज्यम्

  • 26 Jan 2026 08:43:47 से 26 Jan 2026 10:15:47 तक
  • 26 Jan 2026 21:34:53 से 26 Jan 2026 23:04:53 तक